अन्याय पर न्याय, कटुता पर मधुरता, झूठ-फरेब पर स्नेह-सदभावना की जीत का पर्व होली भाग-1
तामसी प्रवर्तीयां एवं कुसंस्कार यानि ईर्ष्या,अनाचार,दुर्भावना एवं, अभिमान, असहिष्णुता,अविश्वास रूपी होलिका को होली की दिव्य अग्नि में भस्म कर देना ही सच्चा ‘होलिका दहन’ है। रगोंत्स्व यानि होली खेलने की सार्थकता तभी होगी जब हम परमात्मा में श्रदा रखते हुए सात्विक विचार, सकारात्मकता,स्नेह, प्रेम, सोहार्द, सहिष्णुता,सह्रदयता और करुणा के रंग में अपनी अंतरात्मा को रँग … Read more