बड़ी शिद्दत से आशा की थी किशनगढ़ ने, मगर कम्बख्तों ने सजदा ही नहीं किया*
बिरदीचन्द मालाकार मैं कल का कृष्णगढ़ और आज का किशनगढ़ हूँ। और कहने को तो मैं आज पूरे 410 बरस का हो गया हूँ और लोग कहते हैं कि मेरा अतीत बहुत गौरवशाली रहा है और मेरे शासकों ने मुझे अपने खून पसीने से सींचकर लगातार मेरा मान बढाया था जिससे मैं आज भी पूरी … Read more