हाथ कांपते है मेरे मैं ब्रह्मलीन नही लिख पाता हूं…
आज 10 जनवरी है… समय चक्र के साथ जिंदगी का मुकाम तेजी से नजदीक आ रहा है ! हमसे विदाई ली आपने ! आसुओं से भरी आंखे सूखी हुई लगती है। पथरा सी गई यह आंखें, कभी -कभी आपका स्मरण होने पर बहुत नम हो जाती है ! कभी जब आप का मेरे सामने होने … Read more