कब तक दांव पर लगेगा नारी अस्तित्व?

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बुराड़ी के भीड़भरे इलाके में मंगलवार को दिन-दहाड़े बीच सड़क पर 21 साल की एक युवती को 34 साल के एक सिरफिरे आशिक ने ढाई मिनट में कंैची से बाइस बार गोद डाला, इस रोंगटे खड़ी कर देने वाली दर्दनाक, वीभत्स, डरावनी घटना को देखकर देश की संवेदना एक बार फिर … Read more

बनाईये अपने बुढ़ापे को जिन्दगी का गोल्डन पिरीयड –पार्ट 4

इन सच्चाईयों को याद रक्खें कि नदी खुदका पानी नहीं पीती है, पेड़ कभी भी अपने फलों का सेवन नहीं करते है, फूल कभी भी अपनी खुशबु का आनन्द नहीं उठाते हैं, सूर्य कभी भी अपनी रोशनी से खुद को रोशन नहीं करता हैं उसी प्रकार जीवन का असली आनंद दूसरों को आनंदित रखने ओर … Read more

बनाईये अपने बुढ़ापे को जिन्दगी का गोल्डन पिरीयड –पार्ट 3

खुश रहें, खुशीयाँ बाटें | दुखी नहीं रहें, दूसरों को दुखी नहीं करें | खुश रहने के लिये दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लें और हो सके तो उसे उठायें ही नहीं | अपनी सदभावनाओं, आशीर्वाद, स्नेह-प्रेम तथा शुभकामनाओं की दोलत दूसरों को दें | दिमाग पर बोझ नहीं रक्खें … Read more

एक आधुनिक सौगात है क्राउडफंडिंग

एक नया बनता हुआ भारत हमारे सामने है। इस भारत के कई सपने हैं। कुछ सपने राजनीति के जमीन से उगते हैं तो कुछ समाज के उर्वर मस्तिष्कों से। कुछ सपने उन आंखों के हैं जिन्होंने अतीत देखा है, तो कुछ उनके जिनकी निगाहों में युवा रंग झिलमिलाते हैं। इन्हीं सपनों ने जीने का नया … Read more

बनाईये अपने बुढ़ापे को जिन्दगी का गोल्डन पिरीयड –पार्ट 2

कहा जाता था कि “अगर आपने अपना चरित्र खो दिया तो सच मानिये कि आपने सब कुछ खो दिया है वहीं अगर स्वास्थ्य खो दिया तो आपने कुछ कुछ खो दिया है किन्तु अगर आपने धन दोलत खो दी है तो आपने कुछ नही खोया है | आजकल सच्चाई यही है कि बुढ़ापे में अगर … Read more

बनाईये अपने बुढ़ापे को जिन्दगी का गोल्डन पिरीयड –पार्ट 1

विगत 100-150 वर्षों में वैज्ञानिक सोच और आविष्कारों की वजह से मनुष्य की औसत उम्र में काफी बढ़ोतरी हुई है | आज कल 80 साल या उससे अधिक स्त्री-पुरुषों की संख्या में निरंतर व्रद्धी हो रही है | बुढ़ापे का अध्ययन करने वाले थिंक टैंक मिल्केन इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष पाल इरविंग के अनुसार पारस्परिक सोहार्दपूर्ण … Read more

कागद के ब्रह्म-लोक का लोक-रंग

० मोहन थानवी, बीकानेर राजस्थानी भाषा, साहित्य, कला-संस्कृति के क्षेत्र में वरिष्ठ साहित्यकार ओम पुरोहित ‘कागद’ राजस्थानी भाषा के विद्यार्थियों के मार्गदर्शक के रूप में सदैव हमारे बीच याद किए जाते रहेंगे। उनकी कृतियों में राजस्थानी भाषा की खुशबू पाठकों को मंत्र-मुग्ध करती है। ‘सुरंगी संस्कृति’ निबंध संग्रह ऐसी ही कृति है, जिसमें कागद के … Read more

महातपस्विनी जयमाला जी म.सा.

*महासाध्वी जयमाला जी म.सा. “जीजी”* जैन साध्वी। इनके श्रद्धालु जन *जीजी* म.सा. के नाम से भी पुकारते हे। सौम्य। सरल। तप साधिका। तप चक्रेश्वरी। गुरुदेव ब्रजमधुकर की सुसंस्कारित शिष्या। पग-पग चल कर हजारो किमी की दूरी नाप लेने वाली तपस्विनी। इनकी साथिन साध्वियां *आनंदप्रभा जी चन्दनबाला जी डा.चन्द्रप्रभा जी विनीत रूप प्रज्ञा जी और सुरभि … Read more

हां मैंने आज गणेश विसर्जन देखा है

*मैंने बाजार के फुटपाथ पर सजी भगवान् गणेश जी की मूर्तियो को देखा है ।* *उसी बाजार में गणेश जी का मोलभाव करते भक्तो और दुकानदारो को देखा है ।* *मैंने गली , मोहल्लों और चौराहो पर बड़े बड़े पांडालों में सज धजकर विराजित हो चुके सिद्धि विनायक को देखा है ।* *गणेश महोत्सव मनाने … Read more

प्राकृत का हिन्दी को योगदान

– डॉ. दिलीप धींग (निदेषक: अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र) आधुनिक भारतीय आर्य भाषाओं में हिन्दी का प्रमुख स्थान है। यह लगभग डेढ़ हजार वर्ष पुरानी भाषा है। भारत की बहुसंख्यक आबादी द्वारा हिन्दी बोली, लिखी, पढ़ी और समझी जाती है। देष के विभिन्न भागों और भाषाओं की सम्पर्क भाषा होने के कारण हिन्दी … Read more

झिझक मिटे तो हिंदी बढ़े …!!

एक बार मुझे एक ऐसे समारोह में जाना पड़ा, जहां जाने से मैं यह सोच कर कतरा रहा था कि वहां अंग्रेजी का बोलबाला होगा। सामान्यतः ऐसे माहौल में मैं सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाता। लेकिन मन मार कर वहां पहुंचने पर मुझे अप्रत्याशित खुशी और सुखद आश्चर्य हुआ। क्योंकि ज्यादातर वक्ता भले ही अहिंदी … Read more

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