पृथ्वी दिवस पर मेरे मन के भाव
*सबकी माँ -पृथ्वी* समेट के अपने आँचल में एक एक को पनाह देती है । वो *माँ पृथ्वी* ही तो है जो उफ़ ना किया करती है । हीरे मोती क़ीमती ज़ेवरात सब से सजी होती है । सागर ,नदियाँ ,तालाब जिसकी पहचान होती है । वो *माँ पृथ्वी* गंदे नालों को भी अपना लेती … Read more