फिर वही मौसम बुलाए
फिर वही मौसम बुलाए, फिर वही शामें मिलें, तेरी बातों की महक से, ये हवाएँ फिर खिलें। खामोश बैठे देखते रहें, चाँदनी के सिलसिले, दिल के इन रास्तों पर, तेरे कदमों के काफ़िले। धूप की नरम उँगलियाँ जब छू लें आँगन की ज़मीं, याद की चादर बिछाकर सोएँ कुछ पल हम यहीं। तेरी हँसी के … Read more