मैं एक पेंडुलम हूं
भीतर के होश व बाहर की अनिवार्यता के बीच संतुलन बनाना वाकई कठिन है। आत्मा का सत्य तो आत्यंतिक है ही, भौतिक जगत का सत्य भी नकारा नहीं जा सकता, भले ही वह नश्वर है। प्रतिपल भस्म होता है, मगर जब गुजर रहा होता है, तब तो तात्कालिक सत्य होता है। परस्पर सर्वथा विरोधी धु्रवों … Read more